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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 38
गुदयोनिं समाकुच्य कृत्वा चापानमूर्ध्वगम् । योजयित्वा समानेन कृत्वा प्राणमधोमुखम् ।।
गुदाद्वार तथा योनिस्थान (सीवन) का संकोचन कर अपानवायु को ऊपर की ओर ले जायें ताकि वह समान वायु के साथ मिलित होकर प्राणवायु को नीचे की ओर उतार दे। अर्थात् प्राणवायु का गमन नीचे की ओर हो जाय
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