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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 31
अनेन विधिना योगी मन्दभाग्योऽपि सिध्यति । सर्वासामेव नाडीनां चालनं बिन्दुमारणम् ।।
इस प्रक्रिया के अपनाने से हतभाग्य योगी भी सिद्धिलाभ कर लेता है, क्योंकि इसकी प्रभावशालिता से सम्पूर्ण नाड़ियों का परिचालन होकर बिन्दु (वीर्य) का स्थिरीकरण हो जाता है।
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