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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 29
चित्तं चित्तपथे दत्त्वा प्रभवेद्वायुसाधनम् । महामुद्रा भवेदेषा सर्वतन्त्रेषु गोपिता ।।
पुनः चैतन्यस्वरूप में अपनी चित्तवृत्ति को स्थिर करके वायु की साधना करे। इस महामुद्रा को सभी तन्त्रों में गुप्त रखने का आदेश दिया गया है।
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