मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 27
अपसव्येन संपीड्य पादमूलेन सादरम् । गुरूपदेशतो योनिं गुदमेद्वान्तरालगाम् ।।
इस मुद्रा की सम्पन्नता हेतु बाएँ पैर को मोड़कर उसकी एड़ी को गुदाद्वार और शिश्न के मध्य वाले योनिस्थान (सीवन) से लगाकर आदरपूर्वक गुरु के उपदेशानुसार दबाएँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें