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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 26
महामुद्रां प्रवक्ष्यामि तन्त्रेऽस्मिन्मम वल्लभे । यां प्राप्य सिद्धाः सिद्धि च कपिलाद्याः पुरागताः ।।
शिवजी देवी पार्वती के प्रति उन्मुख होकर कहते है - हे प्राणवल्लभे! मैं इस तन्त्र में जिन-जिन मुद्राओं का कथन कर रहा हूँ उन-उन मुद्राओं की साधना से ही सांख्यशास्त्र के प्रवर्तक कपिल आदि प्राचीन ऋषि-मुनियों ने सिद्धि उपलब्ध की थी।
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