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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 25
उष्ड्डानं चैव वज्रोली दशमं शक्तिचालनम् । इदं हि मुद्रादशकं मुद्राणामुत्तमोत्तमम् ।।
(८) उड्डीयान बन्ध, (९) वज्रोली मुद्रा तथा (१०) शक्तिचालिनी मुद्रा। उक्त दश प्रकार की मुद्राएँ समस्त मुद्राओं में सर्वोत्तम है।
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