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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 20
योनिमुद्रा परं गोप्या न देया सस्य कस्यचित् । सर्वथा नैव दातव्या प्राणैः कण्ठगतैरपि ।।
अतएव योगाभ्यासी को निरन्तर अभ्यासपरायण रहना चाहिए। यह योनिमुद्रा अतीव गोपनीय होती है। इसे कभी किसी अयोग्य या अनधिकारी व्यक्ति से प्राण के कंठगत हो जाने पर भी नहीं बतलाना चाहिए।
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