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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 19
कालवञ्चनमभ्यासात्तथा मृत्युञ्जयो भवेत् । वा‌क्सिद्धिः कामचारित्वं भवेदभ्यासयोगतः ।।
अभ्यास के द्वारा ही काल को लाँधकर मृत्युजयी बनने का गौरव भी प्राप्त किया जा सकता है। उसी से वाक्सिद्धि तथा अभीप्सित आचरण की शक्ति भी मिलती है।
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