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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 18
संविदं लभतेऽभ्यासात् योगोऽभ्यासात्प्रवर्तते । मुद्रिणां सिद्धिरभ्यासादभ्यासाद्वायुसाधनम् ।।
अभ्यास की सिद्धि मिलने पर अन्य सिद्धियाँ भी मिलती तथा उसी के द्वारा वह मुक्ति पाने का अधिकारी भी बनता है। अभ्यास के द्वारा ही ज्ञानोत्पत्ति, योग में प्रवृत्ति तथा वायुसाधना की सिद्धि भी सम्भव होती है।
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