गुरुहा च सुरापी च स्तेयी च गुरुतल्पगः ।
एतैः पापैर्न बध्येत् योनिमुद्रानिबन्धनात् ।।
गुरुहन्ता, सुरापानक, चौरकर्मकारक, गुरुशैय्या में रमणकर्ता या इसी प्रकार के अन्य पापों का पातकी साधक भी योनिमुद्रा की सिद्धि पा लेने पर पापकर्मों का फल नहीं भोगता।
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