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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 109
गुरूपदेशविधिना तस्य मृत्युभयं कुतः । मुहूर्तद्वयपर्यन्तं विधिनाशक्तिनाशनम् ।।
इस मुद्रा का अभ्यास गुरु के उपदेशानुसार करने वाले प्राणी को मरण-भय नहीं रह जाता। यदि इस मुद्रा को साधक दो मुहूर्त तक कर ले तो शक्ति का हास नहीं होने पाता।
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