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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 106
शक्तिचालनमेवं हि प्रत्यहं यः समाचरेत् । आयुर्वृद्धिर्भवेत्तस्य रोगाणां च विनाशनम् ।।
यह समस्त शक्तियों की प्रदात्री शक्तिचालित मुद्रा है। प्रतिदिन इस मुद्रा के अभ्यास करते रहने से सभी व्याधियों का विनष्टीकरण होकर आयुवर्धन होता है।
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