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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 103
षण्मासमभ्यसेद्यो वै प्रत्यहं गुरुशिक्षया । शताङ्गनानां भोगेऽपि तस्य बिन्दुर्न नश्यति ।।
यदि उक्त क्रिया का अभ्यास योगी छह महीने तक पूरा कर ले तो सैकड़ों स्त्रियों के समागम से भी उसका शुक्रक्षरण न होगा।
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