एतद्गुह्यतमं मुझे न भूतं न भविष्यति ।
तस्मादेतताबलेन गोपनीयं सदा बुधैः ।।
इस वज्रोली मुद्रा से अधिक गुप्त अन्य कोई साधन नहीं है। इतनी गोपनीय मुद्रा न तो कभी भूतकाल में थी और न हीं भविष्यत् में होगी। अतः इसे प्रबुद्ध साधक सर्वदा ही गुप्त रखे।
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