यदि योगी अपनी जिह्वा का क्षणार्थ मात्र पलटकर तालुमूल में लगा ले तो वह सभी रोगों से विमुक्त होकर वृद्धावस्था पर विजय पा लेता है। अर्थात् खेचरी मुद्रा के द्वारा अमृतपान के फलस्वरूप वह अमरत्व की सिद्धि कर लेता है।
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