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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 94
संवत्सरकृताभ्यासान्मृत्युं जयति निश्चितम् । तस्मादतिप्रयत्नेन साधयेद्योगसाधकः ।।
उक्त प्रकार का अभ्यास निरन्तर एक वर्ष तक करने वाला साधक निश्चय ही मृत्यु को विजित कर लेता है। अतः योगसाधक को इस क्रिया की अवश्य ही साधना करनी चाहिए।
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