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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 84
इदानीं क्लेशहान्यर्थं वक्तव्यं वायुसाधनम् । येन संसार चक्रेऽस्मिन् रोगहानिर्भवेद्ध्रुवम् ।।
देवी पार्वती से शिवजी कहते हैं कि हे देवि! अब मैं सम्पूर्ण क्लेशनिवारक प्राणवायु के उस विधि को बतलाता हूँ जिसके द्वारा सांसारिक रोगों का अवश्य ही विनष्टीकरण हो जाता है।
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