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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 8
नागादिवायवः पञ्च कुर्वन्ति ते च विग्रहे । उद्गारोन्मीलनं क्षुतृट् जृम्भा हिक्का च पञ्चमः ।।
इनके अतिरिक्त नागादि पंचवायुओं का कार्य क्रमशः डकार, हिक्का (हिचकी), जृम्भा (जंभाई लेना), क्षुधा-पिपासा तथा उन्मीलन अर्थात् निद्रितावस्था में नेत्र-पटलों को बन्द कर देना होता है।
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