आधारे घटिकाः पञ्च लिङ्गस्थाने तथैव च ।
तदूर्ध्वं घटिका पञ्च नाभिहन्मध्यकं तथा ।।
वायुधारण के अभ्यास का विधान यह है कि सर्वप्रथम आधारचक्र, पुनः उससे ऊपर स्वाधिष्ठानचक्र, मणिपूरचक्र, अनाहतचक्र, विशुद्धचक्र और आज्ञाचक्र में क्रमश पाँच-पाँच घटी (२-२ घंटे) तक वायुधारण करने का अभ्यासी बने।
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