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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 76
अस्मिन्काले महायोगी पञ्चचा धारणं चरेत् । येन भूरादिसिद्धिः स्यात्ततो भूतभयापहा ।।
योगी द्वारा पाँच प्रकार की धारणा की सिद्धि हो जाने पर उसमें पंचभूतों की धारणा भी सिद्ध हो जाती है। पंचभूतों की सिद्धि मिल जाने के पश्चात् उसे भूतों से कोई भय नहीं रह जाता।
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