अभ्यास के परिणामस्वरूप योगी में परिचयावस्था आ जाने पर वह निश्चित रूप से त्रिकूट कर्मों को देखने में सफल हो सकता है। त्रिकूट कर्म के तीन भेद कहे गये हैं, जैसे - आध्यात्मिक (मानसिक क्लेश), आधिभौतिक (भूत-प्रेत पिशाचादि से मिलने वाला कष्ट) और आधिदैविक (कर्म फलानुसार देवताओं से होने वाला कष्ट)।
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