अर्थात् परिचयावस्था में योगी षट्चक्र (आज्ञाचक्र, विशुद्धचक्र, अनाहत चक्र, मणिपूरचक्र, स्वाधिष्ठान चक्र तथा मूलाधार चक्र) भेदन में अवश्य ही सक्षम हो जाता है। ऐसी अवस्था की प्राप्ति अभ्यास के द्वारा ही सम्भव हो सकती है।
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