वाममात्रं यदा पूर्ण भवेदभ्यासयोगतः ।
एकवारं प्रकुर्वीत तदा योगी च कुम्भकम् ।।
एक बार में कुम्भक प्राणायाम द्वारा आठ घटी (३ घण्टा) तक प्राणवायु को रोक रखने वाला योगी पैर के अंगूठे पर निश्चल भाव से खड़ा रह सकता है।
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