योगी में एक प्रहर (३ घण्टा) तक वायुधारण की शक्ति उत्पन्न होने पर उसमें प्रत्याहार (योग का एक अंग) की शक्ति आ जाती है जिसके फलस्वरूप साधन में कोई अन्तर नहीं रहता, यह बात सुनिश्चित है।
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