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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 66
यदा भवेद् घटावस्था पवनाभ्यासने परा । तदा संसारचक्रेऽस्मिन् तन्त्रास्ति यन्त्र साधयेत् ।।
उसमें किसी की आँखों से ओझल होने (अदृश्यता) तथा आकाशगमन करने की क्षमता भी आ जाती है। ऐसी अवस्था को घटावस्था कहते हैं। अर्थात् ऐसी स्थिति में योगी के लिए संसार की कोई भी वस्तु अलभ्य नहीं रह जाती।
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