विण्मूत्रलेपनं स्वर्णमदृश्यं करणं तथा ।
भवन्त्येतानि सर्वाणि खेचरत्वं च योगिनाम् ।।
कुम्भक प्राणायाम की सिद्धि पा लेने वाले योगी में धातु-परिवर्तन की शक्ति भी आ जाती है। यदि वह अपने मल-मूत्र का लेपन स्वर्ण से इतर किसी अन्य धातु पर कर दे तो वह धातु निश्चय ही स्वर्ण बन जाता है।
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