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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 63
ततोऽ भ्यासक्रमेणैव घटिकात्रित्यं भवेत् । येनस्यात्सकला सिद्धियोगिनः स्वेप्सिता ध्रुवम् ।।
प्राणायाम के क्रमानुसार अभ्यासी पुरुष में जब तीन घड़ी (घटी) तक प्राणवायु के अवधारण की शक्ति उत्पन्न हो जाय तो वह अपनी इच्छानुसार सभी सिद्धियों को प्राप्त कर लेने में समर्थ हो जाता है। यह बात निश्चित रूप से सत्य है।
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