उत्तम योगाभ्यासी पुरुष प्राणायाम की महत्ता के फलस्वरूप अष्टसिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व तथा वशित्व) को हस्तगत कर इस संसार-सागर से पार चला जाता है और तब वह त्रैलोक्यं में अपनी इच्छा के अनुसार परिभ्रमण कर सकता है। यहाँ अष्टसिद्धियों की प्राप्ति का उल्लेख क्रमशः नीचे किया जा रहा है।
अणिमा - मन में इच्छा करते ही शरीर को परमा परमाणु के समान सूक्ष्मतम बना लेना।
गरिमा - हलका होते हुए भी इच्छामात्र से पर्वत से भी अधिक भारवान हो जाना।
ईशित्व - सम्पूर्ण भौतिक पदार्थों के निर्माण एवं विनष्टीकरण की क्षमता का होना।
महिमा - इच्छामात्र से शरीर को विस्तृत कर लेना ही महिमा सिद्धि कहलाती है।
लघिमा - अत्यधिक भारवान होकर भी हलका-फुल्का प्रतीत होना प्राप्ति-मनोनुकूल पदार्थों की तत्क्षण होने वाली उपलब्धि।
प्राकाम्य - संकल्पमात्र से अभिलषित वस्तु की परिपूर्णता।
वशित्व - किसी को अपने वशवर्ती बना लेने की समर्थता।
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