पूर्वार्जितानि पापानि पुण्यानि विविधानि च ।
नाशयेत् षोडशप्राणायामेन योगिपुङ्गवः ।।
उत्तम योगी अपने पूर्वार्जित पाप-पुण्य के कर्म-समूहों का नाश केवल सोलह प्राणायाम के द्वारा ही कर डालता है। प्राणायाम के फलस्वरूप पाप-पुंज उसी भांति जलकर राख हो जाते हैं जिस प्रकार आग में पड़कर तिनका भस्म हो जाता है।
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