उक्त कथित दश वायुओं में भी पाँच वायुओं (प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान) की विशेष रूप से महत्ता रहती है, किन्तु मैंने यहाँ केवल प्राण और अपान - इन दो को ही कहे है।
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