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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 59
पूर्वार्जितानि ऊर्याणि प्राणायामेन निश्चितम् । नाशयेत् साधको धीमानिह लोकोद्भवानि च ।।
योगाभ्यासी साधक पूर्व जन्मार्जित तथा वर्तमानकालिक कृत समस्त कर्मों का प्राणायाम के द्वारा विनाश कर डालता है। अतः प्राणायाम के बल पर योगी के लिए समस्त कर्मों का विनष्टीकरण कर देना सम्भव हो जाता है।
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