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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 51
द्वितीये हि भवेत् कम्पो दार्दुरी मध्यमे मतः । ततोऽधिकतराभ्यासाहगने चरसाधकः ।।
साधक द्वारा दूसरी बार अभ्यास किये जाने पर उसकी देह में कंपकपी तथा तीसरी बार में मेंढकी चाल उत्पन्न हो जाती है।
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