उस क्षण उसके लिए यह आवश्यक होता है कि वह देहनिर्गत पसीने को शरीर में ही मलकर सुखा ले। यदि वह ऐसा करने से हिचकता है तो उसके शरीरस्थ धातुओं का विनाश हो जाता है।
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