मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 47
पूर्वोक्तकाले कुर्यात्तु कुम्भकान् प्रतिवासरे । ततो यथेष्टाशक्तिः स्याद्योगिनो वायुधारणे ।।
इस प्रकार प्रतिदिन कुम्भक प्राणायाम का अभ्यास करते रहने से कुम्भक की सिद्धि मिल जाती है। तत्पश्चात् उसमें वायुधारण की यवेष्ट शक्ति आ जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें