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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 46
ततोऽभ्यासे स्थिरीभूते न तादृ‌नियमग्रहः । अभ्यासिना विभोक्तव्यं स्तोकं स्तोकमनेकधा ।।
योगाभ्यास में दृढ़ता आ जाने पर उसे कथित नियमों के पालन की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। उसे बार-बार अल्प मात्रा में भोज्य पदार्थ ग्रहण करते रहना चाहिए।
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