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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 42
सिद्धान्तश्रवणं नित्यं वैराग्यगृहसेवनम् । नामसङ्कीर्तनं विष्णोः सुसादश्रवणे परम् ।।
योगाभ्यासी पुरुषों के लिए नित्य वेदान्त-वाक्यों का श्रवण, वैराग्य भाव का धारण तथा ईश्वर नामस्मरण करना उचित है।
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