योगाभ्यासी को घी, दूध, मिठाई, पान-सुपारी तथा चूर्ण से रहित आहार लेने चाहिए। उसे कभी भी उत्तेजक पदार्थ, जैसे - कपूर आदि नहीं खाने चाहिए। योगी को कर्कश वाणी का परित्याग कर मधुर वाणी का अभ्यासी बनना चाहिए। साधक को उत्तम कुटिया और स्वस्थ वातावरण में निवास करते हुए महीन वस्त्र पहनने चाहिए। अर्थात् सादे वेश-भूषा में रहना ही उसे आवश्यक होता है।
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