स्त्री-संसर्ग, अग्नि-सेवन, वाचालता, प्रिय-अप्रिय भाषण तथा अतिभोजन योगी के लिए सर्वदा ही अग्राह्य हैं। उसे इनका परित्याग अवश्य ही कर देना चाहिए।
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