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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 37
आम्लं रूक्ष तथा तीक्ष्णं लवणं सार्षपं कटुम् । बहुलं भ्रमर्ण प्रातः हः स्नानं तैलविदाहकम् ।।
योगी के लिए खट्टे, रूखे, तीक्ष्ण, नमकीन, सरसों आदि पदार्थों का सेवन, कहुए पदार्थ का भोजन, अत्यधिक भ्रमण, प्रातः स्नान तथा शरीर में तैलादि का मर्दन करना निषिद्ध है।
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