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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 36
अथ वर्ज्य प्रवक्ष्यामि योगविघ्नकरं परम्। कि येन संसारदुःखाब्धिंतीर्खा यास्यन्ति योगिनः ।।
अब मैं उन विघ्नकारी कारकों का वर्णन करता हूँ जिसके परित्याग से योगी इस संसार-सागर से पार चला जाता है।
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