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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 34
आरम्भः कथितोऽस्माभिरधुना वायुसिद्धिये । अपरः कथ्यते पश्चात्सर्वदुः खीयनाशनः ।।
प्राणवायु की सिद्धि होने पर पूर्व कधित सभी लक्षण आरम्भिक काल में पाये जाते हैं। अब मैं उनसे मिलने वाले उस लाभ का कथन करता हूँ जिससे समस्त दुःखों का नाश हो जाता है।
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