उसके शरीर में सुगन्धि तथा मुखमण्डल पर तेजस्विता की कान्ति झलकने लगती है। ऐसी अवस्था आने पर उसके स्वर में भी मिठास आ जाती है। इन प्रारम्भिक लक्षणों के साथ-साथ उसे योग का पूर्णरूपेण ज्ञान प्राप्त हो जाता है। इसी को योगावस्था भी कहा जाता है।
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