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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 30
गजमा यदा तु नाहीशुद्धिः स्याद् योगिनस्तत्त्वदर्शिनः । तदा विध्वस्तदोषश्च भवेदारम्भसम्भवः ।।
तत्वदर्शी योगी की नाड़ी का परिशोधन हो जाने पर उसके सभी विकार मिट जाते हैं और योगसाधना का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
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