इत्यं मासद्वयं कुर्यादनालस्यो दिने दिने ।
ततोनाडीविशुद्धिः स्यादविलम्बेन निश्चितम् ।।
उक्त कथित रीति से आलस्यविहीन होकर निरन्तर दो मास तक नियमपूर्वक प्राणायाम करने के परिणामस्वरूप साधक के नाड़ी-मल का परिष्कार हो जाता है।
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