ततस्त्यत्तत्वा पिङ्गलया शनैरेव न वेगतः ।
पुनः पिङ्गलयापूर्व यथाशक्ति तु कुम्भयेत् ।।
इस प्रकार बारम्बार पिंगला नाड़ी (दायां नासापुट) से पूरक प्राणायाम करे। पुनः इडा नाड़ी (वाम नासापुट) से वायुः का कर्षण करके कुम्भक प्राणायाम की क्रिया सम्पन्न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।