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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 24
समकायः प्राञ्जलिश्च प्रणम्य च गुरून् सुधीः । दक्षे वामे च विघ्नेशं क्षेत्रपालाम्बिकां पुनः ।।
सर्वप्रथम अपने शरीर को एक सीध में रखकर करबद्ध हो गुरु को प्रणाम करना चाहिए। पुनः दाएँ-बाएँ पार्श्व में विघ्नहर्ता गणेशजी को, क्षेत्रपाल को तथा जगज्जननी देवी अम्बिका को प्रणाम करे।
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