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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 21
चतुर्थ समताभावं पञ्चमेन्द्रियनिग्रहम् । घष्ठं च प्रमिताहारं सप्तमं नैव विद्यते ।।
(४) समस्त प्राणियों में समभाव, (५) इन्द्रियों का दमन तथा (६) संतुलित आहार-ग्रहण। ये ही छह लक्षण मुख्यतया कहे गये हैं। इनके अतिरिक्त कोई सातवाँ लक्षण नहीं होता।
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