(४) समस्त प्राणियों में समभाव, (५) इन्द्रियों का दमन तथा (६) संतुलित आहार-ग्रहण। ये ही छह लक्षण मुख्यतया कहे गये हैं। इनके अतिरिक्त कोई सातवाँ लक्षण नहीं होता।
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