मिथ्यावादरतानां च तथा निष्ठुरभाषिणाम् ।
गुरुसन्तोषहीनानां न सिद्धिः स्यात् कदाचन ।।
मिथ्यावादी, कर्कश वाणी बोलने वाले तथा गुरु के परितोष का ध्यान न रखने वाले व्यक्तियों की भी यही दशा होती है। अर्थात् वे सिद्धि-प्राप्ति हेतु सदा ही अयोग्य साबित होते हैं।
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