मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 18
न भवेत् सङ्गयुक्तानां तथाविश्वासिनामपि । गुरुपूजाविहीनानां तथा च बहुसंगिनाम् ।।
जो पुरुष सांसारिक कार्यों में निरत रहने वाले व्यक्तियों से अत्यधिक सम्पर्क रखते हैं तो उनसे भी सिद्धियाँ दूर रहती हैं। इसी प्रकार अविश्वासी तथा अश्रद्धालु पुरुष भी सिद्धियों को प्राप्त करने से वंचित रह जाया करते है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें