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शिव संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 17
दोर्ध्या पदाभ्यां जानुभ्यां उरसा शिरसा दृशा । मनसा वक्षसा चेति प्रणामोऽष्टांग ईरितः ।।
अर्थात् पैर, जाँध, हृदय, शिर, दृष्टि, मन तथा वक्षःस्थल - इन आठ अंगों से जो प्रणाम किया जाय उसे अष्टांग प्रणाम कहा जाता है। किन्तु यह साष्टांग प्रणाम केवल पुरुषों के लिए ही करणीय होता है, महिलाओं को इस प्रकार का प्रणाम करना वर्जित है।
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